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  • Ujjawal Trivedi

Post Lock Down Content Challenges : कैसी होगीं लॉक डाउन के बाद शो और फिल्मों की कहानियां

इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि लॉक डाउन का असर हम सबकी सोच पर पड़ा है। हम सब ने जब से घर पर रहकर खुद के साथ वक्त बिताना शुरू किया हमें अपने ही बारे मे जानने का मौका मिला। हमारा नज़रिया बदला, हमे वास्तविकता का अहसास हुआ और अब हमारे पैर ज़मीं पर भी टिके है क्योंकि हम ये जान चुके है कि हर दो चार दिनों restaurants में जाकर खाना, बात बात पर online shopping या कुछ भी order कर देना महीने में कई बार pubs में party करना ये सारी वो 'ज़रूरते' है जो असल में कभी इतनी ज़रूरी भी नहीं थी जितनी हमने बना दी थी।



आज हम खुद खाना बनाने, बर्तन धोने, अपने परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिताने की अहमियत समझ पाये हैं तो हमारी आँखे खुली है। हमें समझ आ चुका है कि ज़रूरी क्या है और ज़रूरत किसे कहते है। कई लोगो ने तो इन दिनो में वो कर दिखाया जो वो अपनी पूरी ज़िन्दगी में नहीं कर पाये थे । ये बदली हुई सोच और ज़िन्दगी जीने का तरीका हमारे अंदर के दर्शक को भी बदलने वाला है क्योकि हम अब ज़िन्दगी के नये मायने समझ चुके है।


अब ज़ाहिर है कि यह बदली हुई सोच टीवी शो और फिल्मों के लेखकों की लेखनी पर भी असर डालेगी । साहित्य हो या फिल्मों की कहानियां यह लेखकों की सोच से ही निकलती है और जब सबकी सोच बदल रही है तो ऐसे में इस बात की उम्मीद जगती है कि लेखक अपनी लेखनी से कुछ ऐसा नया content निकालेंगे जो पहले से काफी अलग होगा। जो हम जैसे बदले हुए लोगो को अपील करेगा।


शायद lock down में अलग अलग फंसे एक couple की कहानी जो एक दूसरे से दूर रहकर रिश्ते की अहमियत को समझ पाये या फिर एक दूसरे से प्यार करने वाले एक प्रेमी जोड़े की कहानी जो बस एक दूसरे से शादी करने ही वाले थे कि lock down की वजह से साथ में रहने पर मजबूर हो गये और फिर उन्हे अहसास हुआ कि वो गलती करने वाले थे। कहानी किसी ऐसे इंसान के संघर्ष की जो अपने छोटे शहर से बड़े शहर नौकरी की तलाश में गया था और अब सालों बाद नौकरी जाने की वजह से उसे लौटना पड़ा।


सुनने में ये भी आया था कि फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी एक फिल्म बनाने जा रहे है जिसका नाम होगा '1232 किलोमीटर' ये कहानी है ऐसे कुछ मज़दूरों की जो बिहार के रहने वाले है और नई दिल्ली में मज़दूरी करते है पर अचानक लॉकडाउन के बाद साइकल पर सवार होकर अपने घर बिहार की तरफ चल देते है। विनोद कापड़ी इन लोगो के साथ इस सफर को अपने कैमरे में कैद भी कर चुके है।


बहरहाल इतना तो ज़रूर है कि नयी कहानियों की ज़रूरत होने वाली है क्योंकि lock down से पहले लिखा गया content बिना बदलाव किये दर्शको के सामने परोसने लायक नहीं होगा। ये एक नयी चुनौती है टी वी और फिल्म के लेखकों के सामने, उम्मीद है वो इस ज़रूरत को समझकर कुछ नया सोचेगे जो इस समय उनके दर्शको का मनोरंजन भी करेगा, उन्हे अपनी जैसी कहानी भी सुनायेगा और उनमें हिम्मत से काम लेने का जोशीला जज़्बा भी भरेगा।



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