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  • Ujjawal Trivedi

सुशांत को खोने के बावजूद बाज़ नहीं आया बॉलीवुड !!

सुशांत सिंह राजपूत को खोने के बाद भी बॉलीवुड बदलने के लिए तैयार नहीं है।




आज जहां चारों तरफ सुशांत सिंह राजपूत के साथ हुए नेपोटिज्म और फेवरेटिज्म की बातें हो रही हैं उसी बीच हॉटस्टार पर सात फिल्मों की रिलीज का एलान करने के लिए सिर्फ बड़े सितारों जैसे आलिया भट्ट, अभिषेक बच्चन, अक्षय कुमार और अजय देवगन को ही बुलाया गया जबकि इनके साथ दो और सितारों को भी बुलाया जाना था जिनकी फ़िल्में भी इन्हीं बड़े नामों की फिल्मों के साथ रिलीज हो रही हैं पर शायद जनता ने नेपोटिज्म और Favoritism के लिए अपनी मौन स्वीकृति दी हुई है इसीलिए इन्हें उस प्लेटफार्म पर नहीं बुलाया गया ।


यह साफ तौर पर एक पक्षपात था साथ ही यह जनता के गाल पर तमाचा भी । उसी जनता के गाल पर तमाचा जो जनता इन बड़े सितारों को बड़ा बनने में अपने खून पसीने की कमाई खर्च करती है । इन सितारों ने उसी जनता को मूर्ख समझ कर यह फैसला कर लिया कि लोग उन्हें ही देखना चाहते हैं बाकी बचे दो नामों को नहीं ।



यहां में जिन दो बाकी बचे नामों की बात कर रहा हूं उनमें से एक हैं कुणाल खेमू और दूसरे हैं विद्युत जमवाल ।


आज सवाल यह है कि बॉलीवुड जनता के पैसों से चलता है । जनता जिन्हें पसंद करती है उन पर अपना पैसा खर्च करती है और उन्हें देखती है । आज इस बात की आज़ादी किसने दी है कि यह बड़े सितारे और बड़े बैनर इस बात का फैसला कर सकें कि वह इतने बड़े ऐलान के मौके पर अपनी तुलना में कम पॉपुलर समझे जाने वाले दो सितारों को अपने साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका ना दें।


अगर आपको लगता है कि उनकी गलती है तो इसके लिए आवाज भी आपको ही उठानी होगी । आपको यह बताना होगा कि जो हुआ वह गलत था कम से कम आज हम सबकी आंखें खुल नहीं चाहिए जब हम अपने बीच से सुशांत सिंह राजपूत जैसा सितारा हो चुके हैं जिसके जाने की एक वजह किसी तरह का फेवरेटिज्म और नेपोटिज्म माना जा रहा है ।


हैरानी की बात तो यह है कि इस बड़े ऐलान का हिस्सा बनी आलिया भट्ट जिनके खिलाफ देश के ज्यादातर हिस्सों और सोशल मीडिया पर काफी कड़वे बयान दिए जा रहे हैं। इस सब के बीच आलिया को इस ऐलान का हिस्सा बनाना इस बात की तरफ साफ इशारा है कि बॉलीवुड को जनता की भावनाओं की बिल्कुल भी कद्र नहीं है और जब यह साफ संकेत दे दिया गया है तो ऐसे में बहुत जरूरी हो जाता है अपनी नाराजगी जताना और यह बताना कि जो हुआ वह गलत है और उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



बॉलीवुड को जनता ने बनाया है। वह जनता का मीडियम है। ऐसे में अगर किसी बात पर जनता नाराज है तो उसकी कद्र की जानी चाहिए। अगर हम इसे ऐसे ही नजरअंदाज कर देते हैं तो जाने अनजाने में हो सकता है हमारे सामने एक और सुशांत सिंह राजपूत जन्म ले रहा हो। सुशांत सिंह राजपूत के साथ जो भी पक्षपात हुआ वह साल 2012 13 के दौरान हुआ था जबकि 'बेफिक्रे' और ' रामलीला' जैसी फिल्में बन रही थी ।

इन सारी बातों का खुलासा अब हो रहा है जबकि सुशांत हमारे बीच नहीं हैं।


आज जरूरत इस बात की है कि हम ऐसी दुर्घटनाओं को दोहराए जाने से रोक दे। मैंने अपने ब्लॉग के माध्यम से आपको बता दिया है कि गलती कहां हो रही है इसे सुधारना आपका काम है। इसे सुधारने के लिए आपको सिर्फ अपनी आवाज बुलंद करनी है अपनी नाराजगी जतानी है लेकिन अगर आपको लगता है कि जो हुआ वह सही हुआ तो आप इसी तरह चुप बैठिये ।आपके जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।


इस ब्लॉग को खत्म करने से पहले मैं एक बात और कहना चाहूंगा कि अक्सर यह बड़े सितारे जिनको बड़ा आप बनाते हैं वह इस बात को लेकर बहुत सजग रहते हैं कि वह स्क्रीन किसके साथ शेयर करें और किसके साथ नहीं क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि कहीं ऐसा ना हो कि उनकी पॉपुलैरिटी का फायदा किसी और को मिल जाए साथ ही यह डर भी कि अगर वह कम पॉपुलर चेहरों के साथ देखेंगे तो कहीं उनके फैंस भी उन्हें उन्हीं कम पॉपुलर चेहरों की तरह ना समझ ले। अब जब आप सारी बात समझ चुके हैं कि यह सब आप लोगों के बीच बनी इमेज के डर से किया जाता है तो इस बात पर जवाब देना अब आपकी जिम्मेदारी है

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