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  • Ujjawal Trivedi

न्यूज़ चैनल से उठ गया जनता का भरोसा : PR Agency के हाथ का खिलौना बने पत्रकार

इस समय देश में मुख्य धारा की पत्रकारिता (main stream journalism)अपने निम्नतम स्तर पर दिखाई दे रहा है और यही वजह है कि लोग अब सोशल मीडिया की तरफ मुखातिब होने लगे है । मैने कई बार अखबारों को राजनैतिक कारणों से बिकते देखा है । अक्सर किसी बड़े सौदे में कुछ media houses को किसी एक पक्ष की वकालत करते भी देखा है लेकिन यह पहली बार है कि देश की 130 करोड़ की जनता जिसके खिलाफ पिछले 10 हफ्तों से आवाज उठा रही हो और निष्पक्ष जांच की मांग कर रही हो कुछ न्यूज़ चैनल उसी के साथ खड़े हो जायें। मतलब ये कि जनता के मनोभावों का मज़ाक उड़ाते ये कौन से पत्रकार है जो TRP की अंधी दौड़ में खुद को सरे बाज़ार बेच आए हैं ।



जिस हत्याकांड के लिए महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया गया हो ऐसे कांड की मुख्य आरोपी जिसके खिलाफ देश की तीन बड़ी centralised agencies (CBI, ED & NCB)

नामज़द रिपोर्ट लिख कर कड़ी कार्रवाई कर रही हो उसे एक celebrity बनाकर सबके सामने पेश करनें में

देश के कुछ बड़े पत्रकारो ने ज़रा भी देर नहीं लगाई ।


क्या मुकदमा जिताने के लिए किया गया interview ?


'सबसे तेज' और 'सच' दिखाने का दम भरने वाले कुछ न्यूज़ चैनल उसकी PR agency के हाथ का खिलौना बन कर रह गये । हैरानी की बात तो ये है कि इन सारे चैनल के सामने शर्त रखी गई कि आप उसके खिलाफ इस मामले से जुड़ी कोई भी खबर ऐसी नही दिखायेगे जिससे उसका पक्ष कमज़ोर होता हो ताकि मुकदमा जीतने में मदद मिले। जिसने ये शर्त मानी उसे interview करने का मौका दिया गया ।


इसी के साथ अभी तक जो उंगलियां सरकार और पुलिस पर उठ रही थी अब उनमें पत्रकार और न्यूज़ चैनल भी खड़े हो गये ।



सोशल मीडिया ने निभाई जिम्मेदारी


इस पूरे मामले को सोशल मीडिया के ज़रिए क्रांति लाने के लिए भी याद किया जायेगा । पहले दिन से ही mainstream News Media ने इस पर ध्यान नहीं दिया और यही वजह है कि शुरूआत के एक महीने में जनता सोशल मीडिया पर शोर मचाती रही और उसकी बात सुनने को कोई तैयार ही नहीं था ।


अपना पक्ष रखने का अधिकार सबको


लोकतंत्र में अपना पक्ष रखने का अधिकार सबको है पर अगर कोई पत्रकार किसी हत्या के आरोपी का interview करने जाये और बिना तीखे सवाल पूछे लौट आये तो ना सिर्फ ये लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार है बल्कि देश की 130 करोड़ जनता के साथ विश्वासघात भी है।


क्या ये जनता भविष्य में कभी इन news channels पर भरोसा कर पायेगी?

इनकी पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर लगा दाग कौन मिटायेगा ?

इस interview से TRP तो मिलने से रही जनता का भरोसा भी गया । इस interview की clippings जो you tube पर लगाई गई उसके comment box भी बन्द करने पड़े क्योकि वंहा जनता गालियां दे रही थी ।



इतिहास में लिखा गया काला पन्ना : आने वाली पीढियां पूछेगीं सवाल


जब आने वाली पीढ़ियां इस पूरे कांड के बारे में गूगल पर पढेंगी तब उन्हें इस भयानक सच का भी पता चलेगा कि एक बार हमारे देश में ऐसा भी वक्त आया था जब केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की जनता एक मासूम की हत्या के लिए निष्पक्ष जांच की मांग कर रही थी उसी वक्त लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले देश के सबसे तेज न्यूज़ चैनल हत्या की उसी आरोपी को चमकाने में लगे थे। जनता का साथ छोड़कर आरोपी का पक्ष मजबूत करने में लगे थे ।


हालाकि आरोप अभी अदालत में साबित किए जाने बाकी है लेकिन यह भी उतना ही सच है क्योंकि एक

एक के बाद एक जिस तरह से सबूत सामने आ रहे हैं ऐसे में माना जा सकता है इस मामले में न्याय होने वाला है और आरोपी को सजा होने की पूरी संभावना है यह सब जानते हुए भी अपनी brand value की चिन्ता करे बगैर कुछ पत्रकार ऐसी आग में कूद पड़े जिसके निशान इतिहास में हमेशा हमेशा के लिए दर्ज हो गये है।






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