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  • Ujjawal Trivedi

गाली बकने वाले Youtubers और नशे में रहने वाले Bollywood को क्यों Follow करता है Youth


जब तक सही सवाल नहीं किया जाएगा सही जवाब नहीं मिलेगा। तो सबसे सही सवाल ये है कि हमारे युवाओं के पास रोल मॉडल्स क्यों नहीं है ? ये सवाल पूछना इसलिए जरूरी है क्योंकि हमारा youth जिनको रोल मॉडल समझ कर follow करता हैं असल में वो हमारी नयी पीढी के लिए बहुत खतरनाक हो सकते हैं । उसकी वजह ये है कि ये सब गालियों वाला vulgar content बनाते हैं । जिससे negative vibes create होती है । जाहिर है जो शब्द अश्लील है उनसे कोई Positive सोच तो नहीं बन सकती ।



हैरत इस बात की है कि आखिर क्यों देश के ज्यादातर Top के youtubers एक ही तरह का अश्लील content बनाते है । जो हमारे युवाओं के बीच गंदी सोच को बढावा देता है।


क्या 130 करोड़ की आबादी वाले देश में कोई भी ऐसा नहीं है जो हमारे युवाओं को प्रभावित कर सके उनको उनकी ही भाषा में ये बता सके कि जाना किस तरफ है ?


देश के top के youtubers को कई लाख youth follow करता है जिसे देख कर मुझे ये चिंता होती है कि हमारा युवा गाली बकने वाला और भद्दे मजाक करने वाला बनकर देश को कंहा ले जाना चाहता है ?


दूसरी तरफ नजर जाती है तो ऐसा लगता है कि जैसे यह बॉलीवुड के चेहरे हमारे युवाओं को प्रेरणा दे रहे हो कि हमारे जैसा बनो और हाल ही में जो सच सामने आया है उससे यह साफ पता चलता है यह लोग तो वास्तविक दुनिया में खुद नहीं रहते नशे की दुनिया में पड़े रहते है तो जिसे खुद ही होश नहीं वो दूसरे को क्या सिखाएगा ?


किससे सीखे देश का युवा ?


ऐसे में सवाल है कि हमारे देश का युवा किससे सीखे किस को अपना आदर्श माने ? कहने का मतलब यह है कि 130 करोड़ आबादी वाले देश में युवाओं के लिए जो Role Models दिखाई देते हैं उनमें से ज्यादातर या तो फिल्मों के हीरो हैं या फिर कुछ युटयुबर्स और खतरा इन दोनों को ही फॉलो करने में है क्योंकि इनमें से कोई भी वास्तविक हीरो नहीं है। फिल्मी हीरो सिर्फ कहानियों में ही हीरो का किरदार निभाते हैं जबकि वो असल जिंदगी में हीरो नहीं है । हमें तो अपने youth को real life hero बनाना है और बात करे देश के popular Youtubers की तो वो मनोरंजन और social message के नाम पर गालियां बकते हैं भद्दे और अश्लील मजाक करते हैं जो आपको कहीं भी कोई नई सीख नहीं दे सकता


इस पूरे माहौल को देख कर मुझे ऐसा लगता है कि जैसे मानो कोई कुम्हार सच्चा बर्तन बनाना चाहता हो और उसके पास अपने बर्तन को ढालने के लिए कोई सांचा ही ना हो । जब कोई सांचा ही ना होगा तो फिर बर्तन बनेगा कैसे ?


गलत मिसाल रखने से भटक जाते हैं युवा


आप अपने सामने मिसाल ही गलत रखेंगे तो जाहिर है गलत मिसाल को देखकर गलत इंसान ही तैयार होंगे ।

न तो हमारे बीच कोई राजनेता ऐसे हैं जिन्हें आप अपना आदर्श मान सकते हैं ना ही कोई हीरो ना ही कोई सोशल मीडिया पर्सनैलिटी तो फिर यह देश का युवा किसे फॉलो कर रहा है ?


क्या हमारा Youth किसी अंधेरे रास्ते में बढ़ रहा है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि उसने गलत को ही सही मान लिया है और सवाल यह भी है कि गलत को सही मानने की नौबत आई क्यों ? क्योंकि आसपास कोई है कि नहीं जो सही गलत का फर्क बता सके ।



क्यों बेरोज़गार है हमारा युवा


बेरोजगारी की समस्या । पढ़ने लिखने के बाद भी काम ना मिलने की समस्या । जिंदगी में सही मार्गदर्शन ना मिलने की समस्या । हर तरफ बेवजह की भीड़ की समस्या । आज का युवा एक ऐसी रेस में दौड़ा जा रहा है जिसमें उसे यह भी नहीं पता कि सही पथ क्या है ? सही मंजिल क्या है और अंतिम पड़ाव क्या है ?


मतलब यह कि चले तो जा रहा है पर उस चलने से न तो मंजिल मिल रही है ना रास्ता दिख रहा है और वो बस थके जा रहा है और इसी तरह खूब थकने के बाद भी मंजिल ना मिलने के एहसास से Frustration का जन्म होता है ।


युवाओं में जो ऊर्जा है अगर वह सही जगह ना लगे और अगर उसका सही तरह से कोई मोल ना मिले कोई सीख ना मिले self-improvement ना हो तो वह energy waste हो जाती है । इस खत्म हुई ऊर्जा के बाद शुरू होता है एक अजीब सा गुस्सा । एक बेचैनी और एक असंतोष जो फिर उनको गलत रास्तों पर डाल देता है । अगर युवाओं को इस सब में उलझने से बचाना है तो जरूरत है सही रास्ता दिखाने की, सही मंजिल बताने की और वंहा तक पहुंचने के सही तरीके बताने की ।


कुम्हार की भाषा में कहूं तो एक सच्चा सांचा बनाने की जिसमें डालकर हम अपने युवाओं को सही मंजिल तक पहुंचने में मदद कर सकें लेकिन अफसोस कि हमारे आस पास कोई भी ऐसा नहीं है जोश में मदद कर रहा हो बिहार में चुनाव की खबरें जोरों पर हैं पर मुझे नहीं लगता कि वहां युवाओं को किसी की फिक्र है कि वहां का युवा कहां जाएगा ?


क्या सारे युवा सिर्फ अभिनेता या गायक ही बनना चाहते है ?


आप जानते हैं हमारे देश में करीब 60 फ़ीसदी आबादी 35 वर्ष के नीचे है । पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा युवाओं की आबादी वाला देश आज युवाओं के लिए रोल मॉडल्स नहीं खड़े कर पा रहा है क्योंकि हमारा युवा जिनको देखकर बड़ा हो रहा है वह असल में रोल मॉडल कहलाने के लायक नहीं है । कुछ स्पोर्ट्स पर्सनेलिटीज हैं जिनको देखकर बहुत कुछ सीखा जा सकता है लेकिन उनकी पहुंच भी सब जगह नहीं है ।


एक सवाल मैं सब से पूछना चाहता हूं कि अगर किसी अभिनेता, नेता, गायक या डांसर को आप फॉलो कर रहे हैं तो देश में अच्छे डॉक्टर, अच्छे इंजीनियर, अच्छे वकील, अच्छे समाजसेवी, अच्छे आर्किटेक्ट, अच्छे बैंकर, अच्छे फिनेंशियल एक्सपर्ट, अच्छे बिजनेस एडवाइजर और अच्छे चार्टेड अकाउंटेन्ट कहां से आएंगे ?


क्या सबको सिर्फ नाच गाना करके मनोरंजन के क्षेत्र में ही जाना है ? सच तो ये है कि देश को चलाने के लिए तरह-तरह की प्रतिभाओं की आवश्यकता होती है । अगर एक ही तरह की प्रतिभाएं हमारे देश में होने लगी तो फिर कैसे आप इसको एक सर्व संपन्न राष्ट्र बना पाएंगे ? यह चिंता सिर्फ मेरी नहीं बल्कि आप की भी होनी चाहिए आपके आसपास भी कई सारे युवा होंगे, आप खुद भी युवा हो सकते हैं ऐसे में सबको सोचना चाहिए कि सही रास्ता क्या हो ?


कामयाबी का कोई गूगल मैप नहीं है


यहां कोई गूगल मैप नहीं है जो आपको रास्ता बताएगा यहां का गूगल मैप आपको खुद बनना पड़ेगा। अगर आपके आसपास आपको कोई राह दिखाने वाला नहीं है तो आपको खुद ऐसे लोगों की तलाश करनी होगी जो आपको सही रास्ता दिखाएं।


जरूरत जागरूक होने की है अगर आपको एहसास हो गया है कि आपके पास रास्ता नहीं है तो निश्चित जानिए आप रास्ते को ढूंढ लेंगे लेकिन मुश्किल तब होती है जब आपको यही पता नहीं चलता कि यह रास्ता नहीं है और आप चलते चले जाते हैं क्योंकि आप तो इस धोखे में आगे बढ़ रहे थे कि रास्ता यही है लेकिन बाद में पता चलता है यह तो कोई रास्ता ही नहीं था आप तो बस गोल गोल घूमे जा रहे थे और पहुंचे कहीं नहीं ।


मैं नहीं चाहता कि आपके साथ ऐसा हो कि आप चले तो बहुत पर पहुंचे कहीं नहीं इसलिए यह तय करना जरूरी है कि सही रास्ता क्या है ? सही रोल मॉडल्स कौन है ? किसे फॉलो करना है ? कौन हमारा मार्गदर्शक हो सकता है ।

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