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  • Ujjawal Trivedi

एक कड़वा सच - बिग बॉस जैसे शो के लिए आप ही हैं ज़िम्मेदार ।


मजाक और बदतमीजी में प्याज के छिलके के बराबर अंतर होता है आप हल्का सा सीमा से बाहर हुए और वही बात बदतमीजी में बदल जाती है । ठीक वैसे ही जैसे स्क्रीन पर एक जोड़े को रोमांटिक बातें करते देखना मनोरंजन की श्रेणी में आता है लेकिन जैसे ही बात उनके बिस्तर तक पहुंचती है तो वो सब अश्लीलता की श्रेणी में आ जाता है ।


अफसोस कि हमारे टीवी चैनल पर आने वाले कई शो इस सीमा को लांघ रहे हैं और हम सब कुछ जानते हुए भी चुपचाप इसे होने देते हैं ।


किसे कहते है मनोरंजन


मनोरंजन का मतलब होता है जो हमारे मन को खुश करें और साथ ही हमे और बेहतर इंसान बनाने के एक संदेश भी दे । जैसे जब आप कोई अच्छी किताब या कविता पढते है तो वो ना सिर्फ आपको खुशी देती है बल्कि आपको ज़िन्दगी में कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित भी करती है ।


अब अगर आप मनोरंजन के लिए बिग बॉस देख रहे है तो आपको इनमें से क्या मिल रहा है ? आप खुद ही बताइए । असल में आप जो देख रहे है वो एक ऐसा शो है जिसका होस्ट जमानत पर रिहा है और इसमें दिखने वाले सारे चेहरे वंहा इसलिए आते है क्योकि उन्हे और कहीं काम नहीं मिलता । ऐसा लगता है वो सबके सब किसी तरह अश्लीलता की सारी हदें पार करने का कंपटीशन कर रहे हो। बिग बॉस ना तो हमें खुश कर सकता है और ना ही कोई संदेश दे सकता है ।



वक्त की ऐसी बर्बादी इस दुनिया में शायद ही कहीं और होती होगी । और मुझे दुख होता है कि हमारे बीच रहने वाले कई लोग इस बात से बेखबर होकर अपना कीमती समय इसे देखकर बर्बाद करते रहते हैं और समाज में गलत ताकतों को बढ़ावा देने में सहयोग करते रहते हैं यह लोग भी समान रूप से कसूरवार हैं ।


आपके पसंदीदा ब्रांड भी देते हैं बढावा


हैरानी की बात यह है कि कई सारे ब्रांड जो हमारी जिंदगी में खुशियां भरने का दम भरते हैं वही ब्रांड इसमें पैसा भी लगा रहे हैं और अपनी ब्रांडिंग में खर्च किया गया यह पैसा वह कल को हमारी जेब से ही वसूल करने वाले हैं। इस बेहूदे शों में कई सारे प्रायोजक हैं जो समाज में गंदगी फैलाने वाले कई सारे नामचीन चेहरों को अपने ब्रांड की पापुलैरिटी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं । उन पर पैसा खर्च करते हैं और उसकी कीमत बाद में अपने प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाकर हम से ही वसूल लेते हैं और हम यह सब होता हुआ देख रहे हैं फिर भी कुछ नहीं करते



टीवी चैनल हमसे इस बात के पैसे लेता है कि वह हमें शुद्ध मनोरंजन दे लेकिन उसके बदले मिलावट परोसी जा रही है और हम इसे होने दे रहे हैं । पैसा हमारा, वक्त हमारा, संस्कृति हमारी, सोच हमारी फिर भी कोई और है जो इसे बर्बाद कर रहा है और हम होने दे रहे हैं । गलती यह है कि हम नुकसान होने के बाद चीखने चिल्लाने तो आ जाते हैं लेकिन वक्त रहते कोई कदम नहीं उठाते।



यह एक तरह की हिंसा है जो हमारे साथ हो रही है । हमारी पीढ़ी को बर्बाद कर रही है हम इसे होता हुआ देख रहे हैं फिर भी हम कुछ नहीं करते क्योंकि हमें तो नुकसान होने के बाद चीखना चिल्लाना आता है।



अपने हाथों ही मां- बाप कर रहे है अपने बच्चों को बर्बाद



आप में से कितने मां-बाप ऐसे हैं जो अपने बच्चों को बिग बॉस में दिखाया जाने वाला कल्चर फॉलो करने के लिए आजादी देंगे ? शायद एक भी नहीं लेकिन फिर भी आपने इसकी मौन स्वीकृति दी हुई है कि कोई भी आए हमारे लिए मनोरंजन के बहाने एक ऐसा शो बनाएं और फिर हमारी नई पीढ़ी में जहर घोल कर चला जाए ।

याद रखिए ऐसा करने वालों से ज्यादा बड़ा गुनाह आपका है क्योंकि गुनाह करने से ज्यादा गुनाह को सहने वाला ज्यादा बड़ा कसूरवार होता है क्योंकि वह गुनहगार को गुनाह करने का मौका देता है ।


इस ब्लॉग को सिर्फ पढ लेने से नहीं पड़ेगा कोई भी फर्क


आप इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद फिर से अपनी जिंदगी में मशगूल हो जाएंगे । यह सोच कर कि जो बदलाव लाने का काम है वो कोई और कर लेगा और जो कोई और है वह भी यही सोचेगा यह कोई और कर लेगा और यह जिम्मेदारी कोई और से कोई और तक होती हुई कहीं और ही चली जाएगी और होगा कुछ भी नहीं।



आपको इस ब्लॉग ने इस बात का एहसास तो कराया है कि गलती आपकी है लेकिन फिर भी आप इसे दूर करने की कोई पहल करने की हिम्मत नहीं रखते । जानते हैं क्यों ? क्योंकि आपको 'सब चलता है' वाली संस्कृति की आदत हो गई है और यही वजह है कि कोई भी आता है और आप की संस्कृति को दूषित कर के चला जाता है और आप क्या करते हैं बाद में बस सीखते चलाते हैं ।


एक कड़वा सच


अगर ऐसे चलता रहा तो एक दिन आप चीखने चिल्लाने लायक भी नहीं रहेंगे क्योंकि वैसे भी अब आप के चीखने चिल्लाने से किसी को भी फर्क पड़ना बंद हो चुका है। टी वी चैनल तो अपनी मन मर्ज़ी जो आता है दिखाते ही है।



अगर आप चाहते हैं कि वाकई आपकी बात सुनी जाए तो पहल आपको करनी होगी यह मानकर यह आप इस दुनिया में अकेले एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिसके पहल करने पर ही ऐसे टीवी शो पर लगाम लगाई जा सकती है अगर आप ऐसा सोच सकते हैं तब तो मेरे इस ब्लॉग को लिखने का मकसद पूरा हुआ वरना आपने पिछले दो मिनट में जो भी पढ़ा वह असल में वक्त की बर्बादी से ज्यादा कुछ भी नहीं।


आने वाली पीढ़ियां आपसे सवाल जरूर पूछेंगी कि जब कोई आपके देश में घुसकर इस तरह की संस्कृति परोस रहा था तब आप मूक दर्शक बने क्यों देख रहे थे ? अभी के लिए ना सही लेकिन उस वक्त के लिए एक जवाब जरूर तैयार कर कर के रखना।

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