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ऋषि कपूर की 'खुल्लम खुल्ला' से कुछ यादें

जैसे आम तौर पर मियां बीवी के बीच झगड़े होते हैं और उनके बीच बातचीत बंद हो जाती है वैसा ही कुछ नीतू और ऋषि कपूर के बीच भी होता था और इस बात का जिक्र उन्होंने अपनी Autobiography 'खुल्लम-खुल्ला' में साफ किया है । उन्होंने लिखा कि फिल्म ‘जब तक है जान’ के दौरान साल 2012 में उनकी नीतू से बातचीत बंद थी लेेकिन तब भी वह दोनो फिल्म में साथ काम कर रहे थे।





कुछ ऐसा ही दौर पहले भी आया था जब ये दोनों फिल्म ‘झूठा कहीं का’ के एक गाने ‘जीवन के हर मोड़ पर…’ को शूट कर रहे थे । इस दौरान भी दोनों के बीच बातचीत नहीं होती थी। वैसे ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि जब कोई अपने जीवन के कड़वे पलो को भी याद रख पाए, उस बारे में खुल कर बात कर पाए और उनसे कुछ सीख देने की कोशिश भी करे पर चिन्टू वाकई अलग थे।

साल 2015 में अपनी शादी की 35 वीं सालगिरह ऋषि कपूर और नीतू कपूर नहीं मना सके क्योंकि उन दिनों ऋषि कपूर परेश रावल के साथ ‘पटेल की पंजाबी’ शादी नाम की फिल्म में काम कर रहे थे उनके पास वक्त नहीं था और दोनों के बीच बातचीत बंद लेकिन इस सब के बाद भी दोनों ने एक दूसरे का साथ निभाया और एक दूसरे को समझने की हर बार कोशिश की।

ऋषि कहते थे कि ऊपर वाले पर उनका विश्वास हमेशा से रहा है और वह हमेशा से ही रोज़ाना पूजा करते रहे फिर भी उन्होंने कहा कि उनके धर्म और उनके भोजन का कोई सीधा संबंध नहीं है वह बीफ खाने वाले हिंदू के तौर पर ही जाने गये क्योंकि उनका मानना था कि भोजन का संबंध किसी तरह की श्रद्धा या धर्म से नहीं हो सकता। यह सारी बातें बार-बार एक बात साफ करती हैं कि वह व्यक्ति बहुत साफ दिल था।


पत्नी नीतू धोती थी उनकी सफेद शर्ट


फिल्म प्रेम रोग की शूटिंग के दौरान जब ऋषि कपूर हॉलैंड गए थे उस वक्त नीतू कपूर और उनकी मां भी उनके साथ थे। फिल्म का स्टाफ ज्यादा बड़ा नहीं था इसलिए नीतू वंहा सबके लिये खुद चाय बनाती और पिलाती थी । शूटिंग के दौरान ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे ने सफेद कपड़े पहने थे शूटिंग एक ही कॉस्ट्यूम था जो लगातार कई दिनो तक पहना जाना था- जाहिर है रोज़ पहन कर शूट करने से सफेद कपजडे मैले हो जाते थे और हैरानी की बात ये है कि नीतू सिंह खुद अपने पति ऋषि कपूर की सफेद शर्ट और उनकी हीरोइन पद्मिनी कोल्हापुरे की सफेद साड़ी शूटिंग के बाद रोज शाम को धोती थी ।


ज़रा सोचिये आज के ज़माने में ये कौन कर सकता है ? वो भी तब जब वो अपने चमकते हुए करियर को छोड़ कर ऋषि कपूर की पत्नी बनी थी। असल में ये सब एक तरह से नीतू का त्याग था अपने पति ऋषि के लिए। वह अपने जमाने की नामी स्टार थी और शादी के बाद उन्होने सब कुछ छोड़ दिया और पति की सेवा में लग गई यह बहुत बड़ा फैसला था जिसको लेने में नीतू की मां ने थी उनकी मदद की थी।बॉलीवुड में हीरोइन का करियर आमतौर पर 21 साल की उम्र में फिल्मी कैरियर शुरू होता है जबकि नीतू सिंह ने अपनी शादी के लिये 21 की उम्र में हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया था वो भी खुशी खुशी।





अपनी ससुराल में दस साल तक रहे ऋषि कपूर


शादी के कुछ दिनों बाद ही ऋषि कपूर ने अपनी ससुराल में रहना शुरू कर दिया था क्योंकि उनके चेंबूर वाले घर में कुछ मरम्मत का काम चल रहा था । उस ज़माने में लोग दो सितारों का काफी मजाक बनाया करते थे एक तो ऋषि कपूर जो अपनी ससुराल में पाली हिल जैसे पॉश इलाके में रहते थे और पाली हिल में रहने वाले दूसरे बडे सितारे थे दिलीप कुमार जो अपनी बीवी सायरा बानो की मम्मी के घर में रहते थे । उस ज़माने में कहा जाता था कि बॉलीवुड में दो बड़े सितारे हैं जो पाली हिल जैसे पॉश इलाके में रहते तो है पर घर जमाई बनकर।


ऋषि कपूर अपनी ससुराल में करीब 10 साल तक रहे। जब रणबीर कपूर का जन्म हुआ उस वक्त भी ऋषि कपूर अपनी ससुराल में ही रह रहे थे । उसके कुछ सालों बाद ऋषि कपूर ने अपनी ससुराल के पास ही पाली हिल के इलाके में एक प्लॉट खरीदा और उसमें अपना बंगला बनाया नाम रखा ‘कृष्णा’ राज अपनी मम्मी के नाम पर।



फिल्मों में वापसी के लिये की नीतू की मदद


2010 में आई फिल्म ‘दो दूनी चार’ में ऋषि कपूर के साथ जूही चावला को लिया जाना था लेकिन जूही चावला एक मां का किरदार निभाने के लिए तैयार नहीं थी इसलिए ऋषि कपूर ने खुद नीतू से गुज़ारिश की कि वो उनके साथ काम करें । नीतू ने पहले तो इंकार कर दिया पर ऋषि कपूर ने उन्हें किसी तरह अपनी फिल्म के डायरेक्टर हबीब फैज़ल से मिलने के लिए तैयार कर लिया ।


दोनों सिर्फ 20 मिनट के लिए मिलने गए थे और 1 घंटे के बाद जब बाहर निकले तब तक नीतू फिल्म की पूरी कहानी सुन चुकी थी और मन ही मन यह फैसला भी कर चुकी थी कि वह ये फिल्म जरूर करेंगी लेकिन यह सफर भी आसान नहीं रहा क्योंकि नीतू लगातार अपने डायलॉग्स भूलती रहीं । यहां तक कि पहले दिन की शूटिंग बड़ी मुश्किल से पूरी हुई।


असल में नीतू पूरी तरह से भूल चुकी थी डायलॉग कैसे याद रखे जाते हैं क्योंकि वह कई सालों के बाद किसी फिल्म के सेट पर काम करने वापस आईं थीं और बिना चश्मा पहने उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता था। ऋषि कपूर ने उनको नए सिरे से सिखाया कि डायलॉग कैसे याद करना है।


अपना फिल्मी करियर छोड़ने के बाद नीतू ने सिर्फ तीन ही फिल्में की ‘दो दूनी चार’ साल 2010 में और ‘जब तक है जान’ साल 2012 में और ये दोनों ही फिल्में ऋषि कपूर के साथ की इसके बाद वह फिल्म ‘बेशरम’ में काम करने को तैयार हुई साल 2013 में क्योंकि इसमें उन्हें अपने बेटे रणबीर और पति ऋषि दोनों के साथ काम करने का मौका मिला था ।




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