डॉन की बीवी से इश्क ने छीन ली इस व्यक्ति की जान, लालच में बर्बाद हुई जिंदगी



Updated: 13 December, 2022 3:05 pm IST

कभी-कभी सोच समझकर ना की गई कुछ चीजें हमें जिंदगी में बहुत भारी पड़ जाती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ राजस्थान के अलवर में रहने वाले नितेश जैन के साथ एक ऐसा व्यक्ति था जो शॉर्टकट में पैसे कमाना चाहता था और इसके अंदर लालच भी था। इसी लालच के बीच इसकी मुलाकात कुछ सट्टे लगाने वाले लोगों से हुई। सट्टा एक ऐसी चीज है जो व्यक्ति को किसी नशे की तरह लग जाता है और बर्बाद कर देता है। वो भी इस दलदल में फंसता चला गया 1 दिन उसके ऊपर हत्या करने का आरोप लगाकर उसे जेल भेज दिया गया।

जेल में रहने के दौरान यहां पर उसकी जान पहचान कुछ गुंडे बदमाशों से हो गई। उसे लगा कि इस इस दुनिया में भी वह कुछ ना कुछ कर सकता है क्योंकि बाहर तो अब उसका नाम खराब हो चुका है। हालांकि, कुछ दिनों बाद वो जेल से बाहर आ गया जहां उसने कंट्रोल करने की कोशिश तो की लेकिन वहां भी वह सट्टेबाजी किया करता था।

इन सबके बीच 1 फरवरी 2022 को नितेश अचानक से लापता हो गया। वो अक्सर ही एक-दो दिन के लिए गायब हो जाता था और फिर खुद ही वापस आ जाता था या परिवार को फोन करके बता देता था। यही सोचकर परिवार वालों ने ध्यान नहीं दिया लेकिन जब वह 7 फरवरी तक नहीं लौटा तो घरवाले पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस उसके रिकॉर्ड के बारे में जानती थी इसलिए उन्होंने घरवालों को समझा-बुझाकर वापस भेज दिया। परिवार जब बार बार आने लगे तो पुलिस कहा कि परेशान क्यों हो रहे हो वो आ जाएगा। इस पर परिवार ने बताया परेशानी इसलिए है क्योंकि कुछ दिनों पहले उसने बताया था कि कुछ क्रिमिनल उसके पीछे पड़े हैं जिसमें अजमेर का एक नामी बदमाश हरी लंगड़ा भी शामिल है।

पुलिस ने जब हरी लंगड़ा से पूछताछ की तो उसने कुछ भी नहीं बताया। लेकिन इस कहानी है एक ट्विस्ट है वो ये कि जब नितेश जेल में था तो उसकी हरी से मुलाकात हुई थी और वह उसके घर आने जाने लगा था जहां पर उसकी बीवी के साथ उसकी दोस्ती हुई और नजदीकी बढ़ने लगी। इसके बाद वो हरी लंगड़ा की गैरमौजूदगी में उसके घर आने जाने लगा। एक मामले में वापस जेल चले गए हरी लंगड़ा को जब इस बात की जानकारी लगेगी उसकी गैरमौजूदगी में यह सब चल रहा है तो उसने अपने जान पहचान के बदमाशों को इकट्ठा किया और कहा कि मैं खुली सुपारी दे रहा हूं नितेश जैन को मारने की, तभी मनोज यादव नामक शख्स ये काम करने के लिए सामने आया। 20 लाख रुपए में यह सौदा तय किया गया। यादव ने एडवांस 15 लाख लिए और सोचा कि 5 लाख मैं अपने पास रख लूंगा और 15 लाख में तीन लोगों को हायर का यह सुपारी देता हूं। नितेश के पास भी उड़ती उड़ती यह खबर पहुंच गई कि हरी लंगड़ा को सब कुछ पता चल चुका है और उसे मारने की सुपारी दी जा चुकी है। उसने सोचा कि अब मुझे मेरी सुरक्षा के लिए मेरे पास कुछ हथियार रखने होंगे उसने अपनी जान पहचान के लोगों से पता किया तो यह सामने आया कि 3 लोग उसे फिरोजाबाद से हथियार दिला देंगे। अजमेर और अलवर से उसने हथियार इसलिए नहीं खरीदा क्योंकि इस बारे में हरी लंगड़ा को जानकारी आसानी से मिल सकती थी।

नितेश यह नहीं जानता था कि जिन तीन लोगों के साथ ही हथियार लेने के लिए जा रहा है उन्हीं ने उसे मारने की सुपारी ली है। फिरोजाबाद पहुंचने के बाद इनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि मेरे घर चल कर चाय नाश्ता करते हैं उसके बाद आगे का काम करेंगे। इसके बाद जब ये उस व्यक्ति के घर पहुंचे तो इन तीनों ने मिलकर नितेश को खत्म कर दिया और कंस्ट्रक्शन के काम के बीच ही जमीन में उसे दफना कर वापस आ गए।

पुलिस ने हरी लंगड़ा को पूछताछ के लिए पकड़ रखा था और जब मनोज यादव का नाम सामने आया तो पुलिस ने उसे भी उठा लिया। पूछताछ में यादव ने बता दिया कि उसे किसने सुपारी दी है और आगे उसने क्या किया। अब पुलिस ने गिरफ्तारी की बात को दबाकर उन तीन लोगों के फोन का इंतजार किया क्योंकि उन्हें यादव से पैसे लेना बाकी थे। एक दिन फोन आया और पुलिस ने प्लान के मुताबिक तीनों को एक सुनसान जगह पर बुलाया मनोज को वहां भेजा और सभी पकड़ में आ गए और पूरा मामला खुला। इसके बाद पुलिस ने फिरोजाबाद से नितेश की लाश बरामद की ओर परिजनों को सारी जानकारी दी। इस तरह से लालच में फंसे नितेश के अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

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