भेदभाव से मुक्त समाज के निर्माण के लिए मनाया जाता है विश्व मानवाधिकार दिवस



Updated: 10 December, 2022 1:46 pm IST

किसी भी व्यक्ति को धर्म, लिंग, जाति, रंग और राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव से बचाने के लिए जागरूकता लाने के उद्देश्य से हर साल 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1948 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र ने मानव अधिकारों को अपनाने की घोषणा की थी। साल 1950 में संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों को आमंत्रित किया और 423 (v) रेजोल्यूशन पास कर सभी देशों और संगठनों को इस दिन को मनाने की सूचना जारी की गई।

साल 2022 में मानव अधिकार दिवस की थीम सभी के लिए प्रतिष्ठा स्वतंत्रता और न्याय रखी गई है। भारत के संविधान में भी मानव अधिकार की गारंटी दी गई है और शिक्षा अधिकार भी इसी गारंटी के अंतर्गत बनाया गया है। 28 सितंबर 1993 से हमारे देश में मानव अधिकार कानून को अमल में लाया गया था। इसके बाद 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किया गया।

जानें अपना अधिकार

सभी मनुष्यों को जन्म से ही अधिकारों के तहत स्वतंत्रता और समानता प्राप्त है। उन्हें परस्पर भाईचारे की भावना से बर्ताव करना चाहिए और हर किसी को समान मानकर चलना चाहिए। नस्ल, रंग, लिंग, भाषा, जाति, संपत्ति, सामाजिक उत्पत्ति, जन्म, राजनीतिक या अन्य विचार से कोई भी भेदभाव नहीं किया जा सकता। देश चाहे स्वतंत्र हो, संरक्षित हो, स्वशासित हो या परिमित प्रभुसत्ता वाला हो वहां की राजनैतिक, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिति के हिसाब से निवासियों से कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

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