मनोज बाजपेयी को गुस्सा क्यों आता है ? हीरो को नॉमिनेट किया जाए सपोर्टिंग एक्टर के रूप में तो क्या करेगा कोईॽ



Updated: 30 October, 2022 8:50 am IST

मनोज बाजपेयी मंजे हुए एक्टर हैं। लेकिन उन्हें खास तौर पर शुरुआती वर्षों में मेन स्ट्रीम सिनेमा का एक्टर नहीं समझा गया। यही माना गया कि वह आर्ट फिल्मों के लिए उपयुक्त हैं। इस बात के लिए वह कई बार नाराज भी हुए। कई फिल्मों में स्ट्रांग कैरेक्टर होने के बावजूद उन्हें हीरो के रूप में प्रोजेक्ट नहीं किया गया। 2003 में आई पिंजर के दौरान कुछ ऐसा ही हुआ और इस पर मनोज बाजपेयी ने नाराजगी भी दिखाई। वह फिल्म के लीड हीरो थे। उनका कैरेक्टर फिल्म की नायिका उर्मिला मातोंडकर के अपोजिट था। लेकिन उन्हें वह वरीयता नहीं दो गई, जो किसी हीरो को दी जाती है। इस फिल्म को चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने डायरेक्ट किया था, जो उन्हें अपने टीवी धारावाहिक चाणक्य के लिए मशहूर थे। पंजाबी भाषा की मशहूर लेखिका अमृता प्रीतम के उपन्यास पिंजर पर उनकी यह फिल्म आधारित थी।

पिंजर में मनोज बाजपेयी ने राशिद नाम के व्यक्ति की भूमिका निभाई थी। राशिद आपसी रंजिश के कारण रज्जो (उर्मिला मातोंडकर) को किडनैप कर लेता है। मन से वह बुरा नहीं है। चूंकि रज्जो की फैमिली ने उसकी फैमिली के साथ बुरा व्यवहार किया था और उनकी प्रॉपर्टी हड़प ली थी, इसी के चलते वह रज्जो का अपहरण करता है। बाद में वह उसे छोड़ भी देता है। लेकिन रज्जो की फैमिली उसे अपनाने से मना कर देती है। आगे की कहानी पिंजर को देश विभाजन की राजनीतिक त्रासदी को मानवीय नजरिए से देखती है।

वह दौर फिल्मी गानों के कैसेट्स और सीडीज था। जब पिंजर के कैसेट और सीडी रिलीज किए गए तो मनोज बाजपेयी यह देखकर हैरान रह गए कि उनके कवर्स पर कई जगह उनके फोटो ही नहीं थे। मनोज बाजपेयी का प्रोड्यूसर्स से इस विवाद भी हुआ। उनका तर्क था कि वह फिल्म में लीड रोल में हैं। उनका कैरेक्टर उर्मिला मातोंडकर के अपोजिट है। ऐसे में उन्हें एक समान पब्लिसिटी मिलनी चाहिए। लेकिन उस दौर में मनोज बाजपेयी की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कुछ अच्छा बिजनेस नहीं कर रही थी, अतः उन्हें लगा कि हो सकता है इसके चलते भी उनके यह व्यवहार किया जा रहा हो। मनोज बाजपेयी ने किसी तरह से अपने आप को समझाया।

इसके बाद बात तब और बढ़ गई जब स्क्रीन अवार्ड्स के नॉमिनेशन हुए। उन्हें स्क्रीन अवार्ड्स और पीपल्स चॉइस के बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर्स की कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया। यह देखकर वह मनोज खुल कर बोले। उन्होंने स्टेटमेंट दिया कि वह फिल्म में मेन हीरो हैं। उन्हें सपोर्टिंग एक्टर के रूप में किस तरह से नॉमिनेट किया जा सकता है। खैर यह अवॉर्ड उन्हें नहीं मिले। लेकिन बाद में नेशनल अवार्ड का स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड उन्हें जरूर मिला। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी। (यह तमाम जानकारियां पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं)

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